कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| स्वप्नातलं गाव ... ! | संदीप चित्रे | 0 | |
| (समजून) | चतुरंग | 0 | |
| ये मेरी दुनिया नहीं ! | उदय सप्रे | 0 | |
| आभास | सुवर्णमयी | 0 | |
| मधुशाला - एक मुक्तचिंतन आणि भावानुवाद (भाग ६) | चतुरंग | 0 | |
| आठवण सुद्धा... | मी अश्विनी | 0 | |
| एक ऐकशील? | मी अश्विनी | 0 | |
| नको मारू खडा रे सख्या | फटू | 0 | |
| काही आठवत नाही | शितल | 0 | |
| मद्य काव्य... मदिरेचे हाणतो पेले, धुंद तळीराम | तळीराम | 0 | |
| ('रेशमीया' मेल्यानी) | चतुरंग | 0 | |
| गे मला गे चंडिके... | केशवसुमार | 0 | |
| (...लवकर ये!) | चतुरंग | 0 | |
| (इतिहास) | केशवसुमार | 0 | |
| इतिहास | अनिरुद्ध अभ्यंकर | 0 | |
| आठवण... | प्रगती | 0 | |
| चैत्रामधले मैत्र! | अशोक गोडबोले | 0 | |
| माझी सुडंबने | मिनासो | 0 | |
| आई समीप येता | अजय जोशी | 0 | |
| तेव्हा आई तुझी खूप आठवण येते | फटू | 0 |