| काटा रुते कुणाला, बोंबील खाती कोणी |
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ॐकार |
| बायको नावाचे वेगळेच प्रकरण आपल्या पुढे येते.... |
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विजुभाऊ |
| कविता सुचे कुणाला ... |
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केशवसुमार |
| 'बाटा' रुते.. |
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चतुरंग |
| बोले हो बॉस कुणाला (विडंबन गीत), काटा रूते कुणाला (मूळ गीत) |
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प्रा सुरेश खेडकर |
| अथांग सागर |
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सुवर्णमयी |
| सळसळणार्या फांद्यांवरती शेंगा फिक्क्ट सोनेरी |
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ॐकार |
| जेव्हा तिची नि माझी ... |
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केशवसुमार |
| (कुणि जाल का, सांगाल का..) |
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चतुरंग |
| ((कुणि जाल का, सांगाल का..)) |
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केशवसुमार |
| चाळ ही हदरून जाते |
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केशवसुमार |
| (वाट) |
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केशवसुमार |
| सुनीतः एक प्रयत्न |
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ऋषिकेश |
| विडंबन - तोच नौरोबा घरात, स्थूल आणि स्वस्थ ही |
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अविनाश ओगले |
| विडंबन - जे खावे पचण्याचे वय निघून गेले |
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अविनाश ओगले |
| अंतर |
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सचिन |
| मी दारु प्याली नाही....... |
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ब्रिटिश टिंग्या |
| विडंबन-गुत्त्याच्या रे उंबरठ्यावर आपण दोघे. |
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अविनाश ओगले |
| या दोन ओळी घ्या... पुढचे शेर लिहा........ |
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अविनाश ओगले |
| सगळ्याना ओपन चॅलेंज........र ला ट न जुळवता चारोळी |
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विजुभाऊ |