कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| वाटले की ती,अशी...जवळूृृृऽन गेली! | सत्यजित... | 0 | |
| वाटले की ती,अशी...जवळूृृृऽन गेली! | सत्यजित... | 14 | |
| माैन | मी-दिपाली | 0 | |
| माैन | मी-दिपाली | 12 | |
| असा भास होतो | मनोज | 0 | |
| असा भास होतो | मनोज | 5 | |
| रूटीनाच्या रेट्यातही | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| रूटीनाच्या रेट्यातही | अनन्त्_यात्री | 4 | |
| अंतर | aanandinee | 0 | |
| अंतर | aanandinee | 2 | |
| भावंडं | मायमराठी | 0 | |
| भावंडं | मायमराठी | 2 | |
| दोघांत सांडलेला अंधार मी गिळालो. | कौस्तुभ भोसले | 0 | |
| दोघांत सांडलेला अंधार मी गिळालो. | कौस्तुभ भोसले | 1 | |
| कळ्या.. | मनोज | 0 | |
| कळ्या.. | मनोज | 1 | |
| ती कळ्या देऊन गेली.. | प्राची अश्विनी | 0 | |
| ती कळ्या देऊन गेली.. | प्राची अश्विनी | 21 | |
| तू गेल्यावर | मनोज | 8 | |
| तू गेल्यावर | मनोज | 0 |