कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| का न व्हावे मी स्वतःच सूर्य !!! | अमोल_००३ | 0 | |
| का न व्हावे मी स्वतःच सूर्य !!! | अमोल_००३ | 2 | |
| ढासळला वाडा | पाषाणभेद | 0 | |
| ढासळला वाडा | पाषाणभेद | 3 | |
| ।। मातृदशक ।। | अमोल_००३ | 0 | |
| ।। मातृदशक ।। | अमोल_००३ | 7 | |
| बायका... | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | 0 | |
| बायका... | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | 54 | |
| चक्र | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| चक्र | अनन्त्_यात्री | 11 | |
| आणि अश्या वेळी | कौस्तुभ भोसले | 0 | |
| आणि अश्या वेळी | कौस्तुभ भोसले | 6 | |
| आत्तापर्यंत काय केलं? | मनिष | 0 | |
| आत्तापर्यंत काय केलं? | मनिष | 10 | |
| यंत्र | निखिल आनंद चिकाटे | 2 | |
| यंत्र | निखिल आनंद चिकाटे | 0 | |
| कोंकणची वेदना.. | अभिबाबा | 0 | |
| कोंकणची वेदना.. | अभिबाबा | 3 | |
| राहून गेले.. | मन्या ऽ | 0 | |
| राहून गेले.. | मन्या ऽ | 4 |