कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| (मल-आशय !) | ज्ञानोबाचे पैजार | 0 | |
| (मल-आशय !) | ज्ञानोबाचे पैजार | 22 | |
| जल-आशय! | अत्रुप्त आत्मा | 0 | |
| जल-आशय! | अत्रुप्त आत्मा | 22 | |
| जुन्या चहाची नवीन उकळी | मनमेघ | 0 | |
| जुन्या चहाची नवीन उकळी | मनमेघ | 3 | |
| इंद्रधनू.... | Jayagandha Bhatkhande | 0 | |
| इंद्रधनू.... | Jayagandha Bhatkhande | 3 | |
| कसाही बरसला, तरी मजा ती संपली. | Sanjay Uwach | 0 | |
| कसाही बरसला, तरी मजा ती संपली. | Sanjay Uwach | 0 | |
| |चाफा| | सरीवर सरी | 0 | |
| |चाफा| | सरीवर सरी | 1 | |
| प्रेम म्हणजे जणू क्रिकेटचा खेळ | खिलजि | 0 | |
| प्रेम म्हणजे जणू क्रिकेटचा खेळ | खिलजि | 3 | |
| मी बिचारा एक म्हातारा | खिलजि | 0 | |
| मी बिचारा एक म्हातारा | खिलजि | 0 | |
| शिकून काय झाले | खिलजि | 0 | |
| शिकून काय झाले | खिलजि | 0 | |
| कसं पटवावं पोरीला ? | खिलजि | 0 | |
| कसं पटवावं पोरीला ? | खिलजि | 8 |