| गीतम् (संस्कृत रचना) |
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अशोक गोडबोले |
| चकाट्या - २ |
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ॐकार |
| मजला बघ प्रीत तुझी कळली |
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रंजन |
| मळमळ |
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केशवसुमार |
| घर |
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सुवर्णमयी |
| मनात माझ्या तुझीच गीते लिहून गेलो... |
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रंजन |
| आताशा मी ग्लास रिकामे मदिरेचे करतो |
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केशवसुमार |
| या तुम नहीं या हम नहीं |
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पंकज |
| प्रार्थना. |
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अशोक गोडबोले |
| एकमेकांसाठी (दुसरी आवृत्ती) |
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धनंजय |
| एक रात्र.. |
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प्राजु |
| चकाट्या |
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ॐकार |
| तरच मग कविता कर... |
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विसुनाना |
| और एक |
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अप्पासाहेब |
| गमभन का?! |
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टीकाकार-१ |
| ही धार पहिलटकरीण ... |
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अप्पासाहेब |
| रेशमाच्या बाबांनी |
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केशवसुमार |
| ती सांज रंगलेली |
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अशोक गोडबोले |
| आयुष्य असेच आहे |
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रंजन |
| खिडकीकडून खिडकीकडे |
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रंजन |