| मधुशाला |
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धोंडोपंत |
| निवारा... |
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प्राजु |
| शिक्षक दिन |
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इनोबा म्हणे |
| उड्डाण पूल |
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इनोबा म्हणे |
| (कातरवेळी) |
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केशवसुमार |
| तूच नव्याने घडशील काय |
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ऋषिकेश |
| काय सांगू नवलाई |
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इनोबा म्हणे |
| मन... |
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शब्दवेडा |
| (नाठाळ मुलांसाठी) बालकविता |
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धनंजय |
| विरूपिका (२) : भविष्य |
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ॐकार |
| तुझ्या डोळ्यांचा थांग घेताना - कविता |
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सागर |
| पाखरु : भाग १ (कविता) |
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सागर |
| एक दिवा |
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मनोज |
| मला कसा हा म्हणतो मेला.... |
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केशवसुमार |
| विंदा करंदीकरांच्या विरूपिका - (१) २८ जानेवारी १९८० |
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ॐकार |
| हात तुझा हातात...... |
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अगस्ती |
| आपण यांना पाहिलंय का? |
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ऋषिकेश |
| समुद्रपक्षी |
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स्वाती दिनेश |
| चारोळी |
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सुशील |
| एडीपस आणि कूटप्रश्न |
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धनंजय |