| किनारा.. |
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पेशवे बाजीराव तिसरे |
| असंही प्रेम असतं!! |
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तुमचा आनंद |
| सुखाच्या शोधात.... (दु:ख)!!! |
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छत्रपति |
| हे स्वप्ना तु स्वप्नात माझ्या येऊ नको......... |
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छत्रपति |
| मी शब्द ओठि रोखले... |
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छत्रपति |
| आई, तुला एकदाच हाक दिली तरी अब्जांनी धावून येशील |
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सनिल पांगे |
| धागा धागा जोडित्..(धागा-४) |
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प्राजु |
| शिघ्रकविता |
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बहुरंगी |
| आजच्या मुली |
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छत्रपति |
| जाळण्या पूर्वी किंतींदा तुम्हीचं तर जाळलं होतं |
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सनिल पांगे |
| ओळखलं तिने मला जागच्या जागी ती स्तब्द झाली |
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सनिल पांगे |
| पुन्हा गंध आला...(गझल) |
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बहुरंगी |
| अतिशय फालतु विनोद |
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बहुरंगी |
| पुण्याचे ट्रॅफिक...नाम॑जूर |
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धमाल मुलगा |
| सुंदर तलम रेशीम.. (धागा -३) |
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प्राजु |
| रिस्क - तळीराम |
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चतुरंग |
| वीणीचा नवा धागा.... |
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प्राजु |
| आयुष्य तेच आहे |
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सनिल पांगे |
| नवी रेशमी वीण.. |
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प्राजु |
| शब्द! |
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ऋषिकेश |