| शहरी माणूस. |
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Deepak Pawar |
| आयुष्याचा डीएने:मॉलिक्य़ूलर बॉयोलॉजीच्या भाषेत: |
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Bhakti |
| (का या गळ्याच्या तळाशी...) |
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कर्नलतपस्वी |
| काळजाच्या या तळाशी राहशी तू. |
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Deepak Pawar |
| बोले चिडीया (मिडीया ?) बोले कंगना..... |
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कर्नलतपस्वी |
| दुःखाच्या वाटेवर गाव तुझे लागले....सुरेश भट |
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चौकस२१२ |
| साद |
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अनन्त्_यात्री |
| कळतं रे पण.. |
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प्राची अश्विनी |
| अव्यक्त |
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कर्नलतपस्वी |
| काहीतरी सलत असतं... |
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Deepak Pawar |
| अशीच एक धुंद, सोनेरी सायंकाळ - (आणि अंतिम वगैरे सत्य) |
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चित्रगुप्त |
| आणि बाकी शून्य... |
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प्राची अश्विनी |
| लिही रे कधीतरी... |
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प्राची अश्विनी |
| विसरु नकोस नाते |
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सागरसाथी |
| हा उन्हाचा गाव आहे. |
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Deepak Pawar |
| विसरून जाऊ सारे..... |
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कर्नलतपस्वी |
| पूर्वसंचित |
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Bhakti |
| मावळतीची दिशा.... |
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कर्नलतपस्वी |
| मनात माझ्या |
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किरण कुमार |
| खजिना |
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अनन्त्_यात्री |