कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| तप्त झाली धारा सारी , दहाही दिशा त्या पेटल्या | खिलजि | 0 | |
| तप्त झाली धारा सारी , दहाही दिशा त्या पेटल्या | खिलजि | 3 | |
| कविची गाडी | प्रदीप | 0 | |
| कविची गाडी | प्रदीप | 6 | |
| हा असा राम की ज्याच्या हजार सीता | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| हा असा राम की ज्याच्या हजार सीता | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| सालं, आज जीव कासावीस झालाय | खिलजि | 5 | |
| सालं, आज जीव कासावीस झालाय | खिलजि | 0 | |
| अनघड शब्दांनो.. | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| अनघड शब्दांनो.. | अनन्त्_यात्री | 4 | |
| सत्वर | शिव कन्या | 0 | |
| सत्वर | शिव कन्या | 2 | |
| बाई पलंगावर बसून होती | खिलजि | 0 | |
| बाई पलंगावर बसून होती | खिलजि | 10 | |
| मी स्वप्न पाहत नाही | खिलजि | 6 | |
| मी स्वप्न पाहत नाही | खिलजि | 0 | |
| असं वाटतं ! | श्वेता२४ | 0 | |
| असं वाटतं ! | श्वेता२४ | 16 | |
| रक्त त्या डोळ्यातले सांगा पुसावे मी कसे? | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| रक्त त्या डोळ्यातले सांगा पुसावे मी कसे? | विशाल कुलकर्णी | 0 |