कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| निर्झर | पाषाणभेद | 0 | |
| निर्झर | पाषाणभेद | 7 | |
| माफ करा राजे आम्ही पितो , होय आम्ही पितो | खिलजि | 0 | |
| माफ करा राजे आम्ही पितो , होय आम्ही पितो | खिलजि | 5 | |
| अभंग... | bhagwatblog | 0 | |
| अभंग... | bhagwatblog | 5 | |
| घनदाट गर्द रेशमी केशकुंतल | अविनाशकुलकर्णी | 0 | |
| घनदाट गर्द रेशमी केशकुंतल | अविनाशकुलकर्णी | 2 | |
| काल धरण बांधिले | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| काल धरण बांधिले | अनन्त्_यात्री | 5 | |
| कधीकधी मी हळवा होतो , बघुनी देव दानवांत | खिलजि | 0 | |
| कधीकधी मी हळवा होतो , बघुनी देव दानवांत | खिलजि | 4 | |
| सुखाच्या सीमेवर दुःखांची घरे वसतात | खिलजि | 0 | |
| सुखाच्या सीमेवर दुःखांची घरे वसतात | खिलजि | 4 | |
| प्रेम कोडगे घेऊन फिरलो | खिलजि | 0 | |
| प्रेम कोडगे घेऊन फिरलो | खिलजि | 3 | |
| पूर्वी आपण जिथे भेटायचो , तिथे आता एक टपरी झालीय | खिलजि | 0 | |
| पूर्वी आपण जिथे भेटायचो , तिथे आता एक टपरी झालीय | खिलजि | 12 | |
| पावसाविषयी असूया | पाषाणभेद | 5 | |
| पावसाविषयी असूया | पाषाणभेद | 0 |