कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| (सिनेमातल्या हिरोंची पूर्वी भरली सभा) | अमोल केळकर | 23 | |
| (सिनेमातल्या हिरोंची पूर्वी भरली सभा) | अमोल केळकर | 0 | |
| दे दे गं! सजणी आधार तुझ्या हाताचे | श्रीकृष्ण सामंत | 4 | |
| दे दे गं! सजणी आधार तुझ्या हाताचे | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| अद्दल | केशवसुमार | 13 | |
| अद्दल | केशवसुमार | 0 | |
| विडंबक | कोलबेर | 11 | |
| विडंबक | कोलबेर | 0 | |
| विठू सांगे... | प्राजु | 49 | |
| विठू सांगे... | प्राजु | 0 | |
| तर हे अस आहे आभासी जग तुमच...!!!! | आंबोळी | 13 | |
| तर हे अस आहे आभासी जग तुमच...!!!! | आंबोळी | 0 | |
| "सहवास" | मनीषा | 8 | |
| "सहवास" | मनीषा | 0 | |
| वात्रटिका | शेखर | 1 | |
| वात्रटिका | शेखर | 0 | |
| तर हे अस आहे कॉरपोरेट जग तुमच...!!!! | स्नेहश्री | 5 | |
| तर हे अस आहे कॉरपोरेट जग तुमच...!!!! | स्नेहश्री | 0 | |
| ((बैल)) | आंबोळी | 20 | |
| ((बैल)) | आंबोळी | 0 |