| पाऊले चालती … विडंबन |
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OBAMA80 |
| त्या तरूतळी |
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अनन्त्_यात्री |
| अनमोल आहे जीवन अपुले मित्रांनो |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| (चार दिवस मिळाले असता ) |
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कर्नलतपस्वी |
| काय करावे |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| सुंदर गीते ही स्मरणात येती |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| चार दिवस मिळाले असतां हसू खेळून निभवावे |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| अक्षय्य तृतीया |
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बाजीगर |
| रोबोटमय जगाने लावला माणसाचा पुर्नशोध |
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माहितगार |
| एआय रोबोट प्रोफेसर |
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माहितगार |
| आता फक्त काढ दिवस |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| लिव अंधभक्ता लिव |
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अमरेंद्र बाहुबली |
| तरी हरकत नाही |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| अरे संस्कार संस्कार |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| पेय निघून गेले (विडंबन) |
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कांदा लिंबू |
| मानवंदना, अनामिक कच्च्यापक्क्या भारतीय गुप्तच'वी'रास |
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माहितगार |
| लिव बामणां लिव |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| आई घरात असतां घर,घरासम भासले |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| प्रीतीची परंपरा आचरणात आणू कशी |
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श्रीकृष्ण सामंत |
| लाख म्हणू देत जगाला, ही संगत अटळ आहे |
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श्रीकृष्ण सामंत |