कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| काठावरती तुम्ही उभे (बैठकीची लावणी) | पाषाणभेद | 5 | |
| काठावरती तुम्ही उभे (बैठकीची लावणी) | पाषाणभेद | 0 | |
| ~ गुढीपाडवा ~ | निमिष सोनार | 2 | |
| ~ गुढीपाडवा ~ | निमिष सोनार | 0 | |
| टारझण मला खास वाटत नाहीत | बाबुराव | 20 | |
| टारझण मला खास वाटत नाहीत | बाबुराव | 0 | |
| (आज अचानक गाठ पडे) | चतुरंग | 38 | |
| (आज अचानक गाठ पडे) | चतुरंग | 0 | |
| एक टुमदार गाव - माझे माधवनगर - भाग - २. | शशिकांत ओक | 7 | |
| एक टुमदार गाव - माझे माधवनगर - भाग - २. | शशिकांत ओक | 0 | |
| नाडि वाचुनी अति मी दमले, थकले रे शशिकांता! | राजेश घासकडवी | 54 | |
| नाडि वाचुनी अति मी दमले, थकले रे शशिकांता! | राजेश घासकडवी | 0 | |
| )तुझ्या रेशमी केसांनी( | sur_nair | 0 | |
| )तुझ्या रेशमी केसांनी( | sur_nair | 0 | |
| ))तुझ्या रेशमी केसांनी(( | तुका म्हणे | 0 | |
| ))तुझ्या रेशमी केसांनी(( | तुका म्हणे | 0 | |
| )तुझ्या रेशमी केसांनी( | राजेश घासकडवी | 2 | |
| )तुझ्या रेशमी केसांनी( | राजेश घासकडवी | 0 | |
| तुझ्या रेशमी केसांनी | विजुभाऊ | 4 | |
| तुझ्या रेशमी केसांनी | विजुभाऊ | 0 |