कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मिठीत तुझ्या असताना... | जेनी... | 0 | |
| मिठीत तुझ्या असताना... | जेनी... | 85 | |
| पराचा पारवा होतो | drsunilahirrao | 0 | |
| पराचा पारवा होतो | drsunilahirrao | 9 | |
| <<<हलकेच सुरसुरी मग नाकातून खाली येते>>> | प्यारे१ | 0 | |
| <<<हलकेच सुरसुरी मग नाकातून खाली येते>>> | प्यारे१ | 75 | |
| इमारत | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 0 | |
| इमारत | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 18 | |
| पाणी | शब्दानुज | 0 | |
| पाणी | शब्दानुज | 16 | |
| हलकेच शिरशिरी मग ओठावरुन जाते | drsunilahirrao | 12 | |
| हलकेच शिरशिरी मग ओठावरुन जाते | drsunilahirrao | 0 | |
| सये... | चिनार | 0 | |
| सये... | चिनार | 4 | |
| अतृप्ती-एक जीवन संघर्ष! | अत्रुप्त आत्मा | 0 | |
| अतृप्ती-एक जीवन संघर्ष! | अत्रुप्त आत्मा | 10 | |
| विसर | आनंदमयी | 0 | |
| विसर | आनंदमयी | 5 | |
| तू | पद्मश्री चित्रे | 15 | |
| तू | पद्मश्री चित्रे | 0 |