कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| शहरी माणूस. | Deepak Pawar | 3 | |
| शहरी माणूस. | Deepak Pawar | 0 | |
| आयुष्याचा डीएने:मॉलिक्य़ूलर बॉयोलॉजीच्या भाषेत: | Bhakti | 5 | |
| आयुष्याचा डीएने:मॉलिक्य़ूलर बॉयोलॉजीच्या भाषेत: | Bhakti | 0 | |
| (का या गळ्याच्या तळाशी...) | कर्नलतपस्वी | 3 | |
| (का या गळ्याच्या तळाशी...) | कर्नलतपस्वी | 0 | |
| काळजाच्या या तळाशी राहशी तू. | Deepak Pawar | 7 | |
| काळजाच्या या तळाशी राहशी तू. | Deepak Pawar | 0 | |
| बोले चिडीया (मिडीया ?) बोले कंगना..... | कर्नलतपस्वी | 7 | |
| बोले चिडीया (मिडीया ?) बोले कंगना..... | कर्नलतपस्वी | 0 | |
| दुःखाच्या वाटेवर गाव तुझे लागले....सुरेश भट | चौकस२१२ | 4 | |
| दुःखाच्या वाटेवर गाव तुझे लागले....सुरेश भट | चौकस२१२ | 0 | |
| साद | अनन्त्_यात्री | 5 | |
| साद | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| कळतं रे पण.. | प्राची अश्विनी | 14 | |
| कळतं रे पण.. | प्राची अश्विनी | 0 | |
| अव्यक्त | कर्नलतपस्वी | 9 | |
| अव्यक्त | कर्नलतपस्वी | 0 | |
| काहीतरी सलत असतं... | Deepak Pawar | 7 | |
| काहीतरी सलत असतं... | Deepak Pawar | 0 |