कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| (या क्वार्टरवेळी) | चतुरंग | 0 | |
| (या क्वार्टरवेळी) | चतुरंग | 20 | |
| विस्तारभयास्तव | स्वामी संकेतानंद | 0 | |
| विस्तारभयास्तव | स्वामी संकेतानंद | 16 | |
| समुद्र | विश्वेश | 0 | |
| समुद्र | विश्वेश | 5 | |
| ..आयुष्याला मी सौख्याचा बाजार म्हणालो.. | कानडाऊ योगेशु | 0 | |
| ..आयुष्याला मी सौख्याचा बाजार म्हणालो.. | कानडाऊ योगेशु | 17 | |
| व्हिडीओ शूट | चाणक्य | 0 | |
| व्हिडीओ शूट | चाणक्य | 8 | |
| मायीवाली ग्लोबल कविता | स्वामी संकेतानंद | 0 | |
| मायीवाली ग्लोबल कविता | स्वामी संकेतानंद | 24 | |
| बारा अमावास्यांचे अंधार | पालीचा खंडोबा १ | 0 | |
| बारा अमावास्यांचे अंधार | पालीचा खंडोबा १ | 8 | |
| जीवनाच्या डावपेचांची नसे पत्रास आता .... | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| जीवनाच्या डावपेचांची नसे पत्रास आता .... | विशाल कुलकर्णी | 2 | |
| जेव्हा माझ्या कर्जांना (एका बँकरचे गार्हाणे) - विडंबन | मंदार दिलीप जोशी | 0 | |
| जेव्हा माझ्या कर्जांना (एका बँकरचे गार्हाणे) - विडंबन | मंदार दिलीप जोशी | 12 | |
| हिरवीन | चांदणे संदीप | 28 | |
| हिरवीन | चांदणे संदीप | 0 |