कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| वसुली | श्रीकृष्ण सामंत | 4 | |
| वसुली | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| हा स्पंद फुलण्याचा | दत्ता काळे | 6 | |
| हा स्पंद फुलण्याचा | दत्ता काळे | 0 | |
| खपली | भास्कर केन्डे | 5 | |
| खपली | भास्कर केन्डे | 0 | |
| माझी विठ्ठल माऊली.. | राघव | 7 | |
| माझी विठ्ठल माऊली.. | राघव | 0 | |
| काळ्या पिशवीत पिशवीत | मूखदूर्बळ | 7 | |
| काळ्या पिशवीत पिशवीत | मूखदूर्बळ | 0 | |
| अर्थ काय ह्याचा? | अरुण मनोहर | 5 | |
| अर्थ काय ह्याचा? | अरुण मनोहर | 0 | |
| फुलपाखरु | अरुण मनोहर | 16 | |
| फुलपाखरु | अरुण मनोहर | 0 | |
| उद्वेग विसरून कसं चालेल? | श्रीकृष्ण सामंत | 25 | |
| उद्वेग विसरून कसं चालेल? | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| (होता खमंग, होता चकणाहि खास बाकी) | चतुरंग | 16 | |
| (होता खमंग, होता चकणाहि खास बाकी) | चतुरंग | 0 | |
| येथे..! | उपटसुंभ | 7 | |
| येथे..! | उपटसुंभ | 0 |