कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| पाहुण तुमी कोण गावचं? | विवेकपटाईत | 0 | |
| पाहुण तुमी कोण गावचं? | विवेकपटाईत | 3 | |
| बऱ्याचदा वाटतं.... | वटवट | 0 | |
| बऱ्याचदा वाटतं.... | वटवट | 2 | |
| मी बी बियर बार काढीन म्हणतो : सामान्य मानव | मुक्त विहारि | 0 | |
| मी बी बियर बार काढीन म्हणतो : सामान्य मानव | मुक्त विहारि | 64 | |
| (मी बी संत्री खाईन म्हन्तो) : सावजी रस्सा | स्वामी संकेतानंद | 0 | |
| (मी बी संत्री खाईन म्हन्तो) : सावजी रस्सा | स्वामी संकेतानंद | 38 | |
| भिकारी... | दिनेश५७ | 0 | |
| भिकारी... | दिनेश५७ | 4 | |
| रे गझलाकारा, आवर तुझे दुकान... | मोदक | 0 | |
| रे गझलाकारा, आवर तुझे दुकान... | मोदक | 45 | |
| ॥सांगा तुकारामा : अभंग-४॥ | गंगाधर मुटे | 2 | |
| ॥सांगा तुकारामा : अभंग-४॥ | गंगाधर मुटे | 0 | |
| ॥सांगा तुकारामा : अभंग-३॥ | गंगाधर मुटे | 0 | |
| ॥सांगा तुकारामा : अभंग-३॥ | गंगाधर मुटे | 1 | |
| ॥सांगा तुकारामा : अभंग-२॥ | गंगाधर मुटे | 0 | |
| ॥सांगा तुकारामा : अभंग-२॥ | गंगाधर मुटे | 19 | |
| काही क्षणिका - स्त्री | विवेकपटाईत | 0 | |
| काही क्षणिका - स्त्री | विवेकपटाईत | 11 |