कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| हे बहुरुपी | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| हे बहुरुपी | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| बघ तुला जमतं का ... | चामुंडराय | 0 | |
| बघ तुला जमतं का ... | चामुंडराय | 2 | |
| बघ तुला जमतं का ... | चामुंडराय | 0 | |
| बघ तुला जमतं का ... | चामुंडराय | 0 | |
| पुष्कळ दूध शिल्लक आहे किंवा दिमाग का दही | दमामि | 0 | |
| पुष्कळ दूध शिल्लक आहे किंवा दिमाग का दही | दमामि | 32 | |
| आयुष्य आणि झरा ... | एकप्रवासी | 0 | |
| आयुष्य आणि झरा ... | एकप्रवासी | 0 | |
| आरसा | प्रावि | 0 | |
| आरसा | प्रावि | 0 | |
| हरिहरि... | दिनेश५७ | 0 | |
| हरिहरि... | दिनेश५७ | 0 | |
| मन | दिनेश५७ | 0 | |
| मन | दिनेश५७ | 0 | |
| देवीची शेजारती | वैभवदातार | 0 | |
| देवीची शेजारती | वैभवदातार | 0 | |
| मी माझे तारांगण सादर करतो | drsunilahirrao | 0 | |
| मी माझे तारांगण सादर करतो | drsunilahirrao | 3 |