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}
|| गणरायाची प्रार्थना ||

"संतांची सरळ साधी शिकवण समजून घ्यावी आणि त्यानुसार आचरण असावे हीच इच्छा. त्या तळमळीतून सुचलेल्या या ओळी."
उत्सवाची शिळा| आली डोक्यावर| दगडांचा भार| माथी बसे||
कुणाला गणेश| कुणा अर्धनर| शापित संकर| प्राणिमात्रे ||
ऐकोनी भीषण| तत्त्वांचे चिंतन| बावळट ध्यान| माझे दिसे||
वेद शास्त्र चर्चा| पुराणांची गाथा| समजो न येता| खोटे कसे||
नको ऐकणे ते| [अर्ध] हळकुंडांचे सार| नसता अधिकार| बुद्धिभेद||
उत्तम गवई| राग साधे जरी| रोग साधे तरी| वैद्यराज||
ज्याचा अधिकार| त्यास त्याचा भार| श्रद्धेचा आचार| सांभाळावा||
दुधातून दही| दह्यातून लोणी| घुसळावी गोणी| अंती सार ||
तुझातच आहे | ब्रह्मतत्त्व जरी| साधनेची रवी| फिरवावी||
संत सांगताती| शास्त्रांची उकल| सद्विचारे बल| वृत्ती साधे||
ऐकावे वाचावे| मनी आचरावे| मन आवरावे| नाम घेता||
कायावाचामने| रुजो सद्विचार| तैसाची आचार| असो द्यावा||
अजाण बालक| प्रार्थितसे भावे| करवोनी घ्यावे| गणराया||
प्रचि श्रेयनिर्देश: आंतरजालावरून साभार, प्रताधिकारमुक्त.